नज़र
नज़र को नज़र की तलाश है
बूँद – बड़े सागर पर, यादों का भवर सवार है
बह गया तोह प्यार बह, रोक लूँ तोह हमारी कहानी है
पलकों ने फिर की सांझेदारी
पास रह कर भी, मिल ना सकी बेचारी
पास रह कर भी मिल ना सकी बेचारी
दूरी का उन्होंने एक बाँध बनाया
बाँध ने रोक ली किस्सों की नदियाँ सारी
बस पल – दो पल का ही तो इंतज़ार है
बस पल – दो पल का इंतज़ार है
नज़रों का दोनों तरफ एक सा हाल ही है
ना रह सकेंगी बिन दीदार के
मुश्किलें भी ना रोक पाएंगी अब इन्हे, हौसलों की बुलंद मशाल है
बस पल – दो पल का इंतज़ार है
नज़रों का दोनों तरफ एक सा हाल ही है
विरह की अग्नि में
यादों के भवर में
हमेशा साथ साथ हैं
हमेशा मन में दुसरे का ख्याल है
ख़तम होगा, हुआ जो सफर शुरू
बस यह ही तो विश्वास बरकरार है
नज़र को नज़र की तलाश है
हर लम्हे में तेरी नज़दीकियों का आभास है
आज रोक न सकेगा कोई भी बाँध
रुकेगा नहीं यह तूफ़ान
जो लाया नयी सुबह का आगाज़ है
थी नज़र को नज़र की तलाश
अब वो हमेशा साथ साथ हैं
इस बड़ी सी दुनिया में
उनका अपना छोटा जहां आबाद है