रावण
कहते हैं के अगर शरीर का कोई अंग सो जाए तोह वहाँ अपनी ऊँगली से ‘रावण’ लिखने पर, वह अंग जग जाता है| मुझे मेरी अम्मी ने बताया और उनको मेरी नानी ने| मैं अक्सर ऐसा करती हूँ – जब बैठे बैठे कभी पैर सो जाते हैं तोह ऊँगली से बड़ा-बड़ा रावण लिख लेती हूँ| बिलकुल जादू की तरह, कुछ ही क्षणों में पैर उठ जाते हैं| एक बार सोचा के रावण की जगह अपना नाम लिख कर देखती हूँ – क्या पता कोई भी नाम काम कर जाए! पैर उठ तोह गए परन्तु समय ज़्यादा लगा. कुछ और नामो से भी प्रयत्न किआ| पैर तो उठ ही जाएंगे पर सबसे काम समय तब लगता है जब रावण लिखते हैं|
आखिर रावण ही क्यों? आज यह विचार मन में आया| शायद माँ ने कहा था – इसीलिए मन में यह विशवास है कि यह बात गलत नहीं हो सकती| फिर एक दूसरा ख्याल भी आया| रावण वह शक्श था जिसके कारण श्री हरी विष्णु भगवन को भी पृथ्वी पर जनम लेना पड़ा था| वैसे तो कहते हैं के भगवान कि इच्छा से ही सब कुछ होता है| मैं इसको पूरी तरह से नहीं मानती| ईश्वर हमको बुद्धि देकर भेज देते हैं| हमारे जीवन के अहम निर्णय कर देते हैं| पर एक उन्नत्ति से दूसरी उन्नत्ति तक का सफर हमको खुद अपनी |बुद्धि से करना पड़ता है| ईश्वर हमारे लिए हमारा जीवन नहीं जीते| अगर इसी बात को माने तोह ईश्वर ने रावण को बुद्धि और बल दिया| उसी बुद्धि और बल से उसने धन, राज्य, शौरत एवं सहस प्राप्त किआ| भगवान कि भक्ति और आराधना से कई सिद्धियां प्राप्त कि| और फिर आया पाप, दुशसाहस एवं अहंकार| ईश्वर ने तोह बस उसको साधन दिए परन्तु उस साधन के प्रयोग से अपने जीवन के निर्णय उसने खुद लिए|
अपने ही मत में इतना आगे बढ़ गया के कहीं उसकी प्रियजन भी अपना मूल्य खो बैठे| पर उसके पराक्रम इतना शक्तिशाली हो गया के ऋषि, मुनि, साधू एवं आम इंसान भी ईश्वर की शरण में जाने का सोच सकते थे| और तब श्री हरी विष्णु भगवन को भी विवश कर दिए इस संसार में अवतार लेने के लिए|
एक तरीके से कहा जाए तोह भगवान इस पृथ्वी को बना कर निश्शिन्त थे| या कह सकते हैं – बस कहने मात्र के लिए के सो गए थे| जब रावण में इतना बल है के वो भगवान को भी निंद्रा के हटा कर उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकता है| फिर मेरे किसी भी पैर की क्या ही मजाल?
क्या रावण सच में कोई था? पता नहीं… तब थी नहीं या कह सकते हैं के तब की याद नहीं| पर आज रावण ज़रूर है| रावण हर वो भाव है जो हमें अपने ही कर्म की तरफ सचेत करता है| रावण हर वह बुरा अनुभव है जो हमको अच्छे और सच्चे रास्ते की ओर मोड़ देता है| रावण हर वो इंसान है जो हमारे जीवन में हमे एक सीख देने आता है| रावण तो बस एक तरीका है यह याद रखने का के हमारे पास हमेशा एक दूसरा रास्ता होता है| यह याद रखने का के छल और बल हमेशा नहीं रहेंगे – पर किसी के लिए कुछ छोटा पर अच्छा काम हमेशा हमें उसके मन में रखेगा| रावण वह पल है जब हमें चेतना आती है के बदलाव की ज़रुरत है|
शायद यही कारण है की राम नवमी पर पूजा होती है पर रावण दहन आज भी भव्य रूप से मनाया जाता है| जगह जगह रामलीला का आयोजन होता है जो अंत में रावण दहन से पूर्ण होता है|
भगवान राम तो हमेशा से ही श्री हरी विष्णु जी के अवतार थे| पर रावण वध के बाद सबको इस बात का ज्ञान हुआ| इसी तरह से जब भी कोई मुश्किल आये या फिर कोई व्यक्ति परेशान करे, तब याद करना चाहिए के इस परिस्तिथि को संभल लिए तो हम इसके बाहर एक आज से अच्छे व्यक्तित्व के साथ आएंगे| और हाँ यह भी याद करना के अगर हाथ या पैर सो जाए तोह ऊँगली से वहाँ रावण लिखने से, वह अंग उठ जाता है|